केन्द्रीय बजट और किसान

  • डाॅ. भागचन्द्र जैन
    प्राध्यापक, (कृषि अर्थषास्त्र)
    कृषि महाविद्यालय, रायपुर-492012

 

‘कृषिरेव महालक्ष्मीः‘अर्थात कृषि ही सबसे बड़ी लक्ष्मी है। भारतीय अर्थ्रव्यवस्था की रीढ़ कृषि कहलाती है, जहां 49 प्रतिषत व्यक्ति खेती कर रहे हैं। भारत विकासषील देष है। भारत सबसे बड़ा चांवल निर्यातक देष है, जहां सबसे ज्यादा दूध और उद्यानिकी फसलों का उत्पादन होता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2014-15 के अनुसार भारत की कृषि विकास दर 5 प्रतिषत रही है, जबकि आर्थिक विकास की दर 7.4 प्रतिषत रही है। सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान हर साल घटता जा रहा है। वास्तविकता यह है कि कृषि केवल जीवन यापन का साधन बनकर रह गई है।
कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए वर्ष 2015-16 के बजट में विभिन्न प्रावधान किये गये हैं, जैसे- कृषि साख में वृद्वि, डाकघर से गावों में कर्ज देना, भूमि स्वास्थ्य कार्ड, ग्रामीण साख निधि में वृद्वि आदि। कृषि और सम्बंधित गतिविधियों के लिए बजट में 11657 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो कि वर्ष 2014-15 में 10199 करोड़ रूप्ये था। कृषि और सम्बंधित व्यवसायों के लिए बजट में की गई वृद्वि से कृषि विकास की दर तेज होगी।

मुख्य प्रावधान
केन्द्रीय बजट में कृषि विकास को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न प्रावधान किये गये हैं, जैसेः

  • कृषि ऋण का लक्ष्य 8.5 लाख करोड़ रूप्ये होगा।
  • तीन लाख रूप्ये तक का कृषि ऋण 7 प्रतिषत ब्याज दर पर यथावत मिलेगा।
  • प्रधानमंत्री ग्रामीण सिंचाई योजना शुरू होगी।
  •  मृदा स्वास्थ्य को विषेष प्राथमिकता।
  • ग्रामीण संरचना कोष के लिए 2500 करोड़ रूप्ये प्रस्तावित
  •  फसल बीमा के लिए 2589 करोड़ रूप्ये स्वीकृत।
  • जैविक खेती विकास हेतु 300 करोड़ रूप्ये का प्रावधान
  • ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा।
  •  डेयरी विकास अभियान के लिए 481 करोड़ रूप्ये का आबंटन।
  • नीली का्रंति के लिए 411 करोड़ रूप्ये का प्रावधान।
  • उर्वरक अनुदान के लिए 72969 करोड़ रूप्ये का आबंटन।
  • दीर्घकालीन ग्रामीण साख निघि के लिए 15000 करोड़ रूप्ये का प्रावधान।
  •  डाॅक घरों से मिलेगा गांवों में कर्ज।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 1800 करोड़ रूप्ये का आबंटन।
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 4500 करोड़ रूप्ये का आबंटन।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुऱक्षा मिषन के लिए 530 करोड़ रूप्ये का प्रावधान।
    कृषि साख
    कृषि में ऋण इंजेक्षन की भूमिका निभाता है। किसानों को समय पर कर्ज मिले, इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है। कृषि में पूंजी निवेष बढ़ाने की दृष्टि से बजट में 8.5 लाख करोड़ रूप्ये ऋण का प्रावधान किया गया है, जो कि वर्ष 2014ऋ15 में 8 लाख करोड़ रूप्ये था। तीन लाख रूप्ये तक का कृषि ऋण 7 प्रतिषत दर पर यथावत मिलेगा।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
    बजट में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 1800 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए 5300 करोड़ रूप्ये बजट में आबंटित किये गये हैं। बजट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना का उददेष्य हर किसान की भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है ओैर सरकार का लक्ष्य ‘हर बूंद के साथ अधिक फसल‘ के जरिये पानी का उचित उपयोग करना है। सिंचाई सुविधा में वृद्वि से फसल विविधिकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी।
  • उर्वरक अनुदान
    केन्द्रीय बजट में उर्वरक अनुदान के लिए 72969 करोड़ रूप्ये आबंटित किये गये हैं, जो कि वर्ष 2014 -15 में 70967 करोड़ रूप्ये आबंटित थे। उर्वरकों की उपयोगिता बढ़ाने में उर्वरक अनुदान महत्वपूर्ण कदम होगा।
  • दीर्घकालीन ग्रामीण साख निधि
    सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की वित्तिय स्थिति सुदृढ़ बनाने के लिए दीर्घकालीन ग्रामीण साख निधि (Long Term Credit Fund) के लिए बजट में 15000 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड
    खेती मिटटी पर आधारित होती है। जैसी मिटटी होगी, जैसे उसमें पोषक तत्व होंगे वैसी ही फसलों की खेती की जायेगीं । इसके लिए मिटटी का स्वास्थ्य जानना आवष्यक है। केन्द्रीय बजट में घेषणा की गई है कि प्रत्येक किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) उपलब्ध कराया जायेगा।
  • जैविक खेती
    जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। बदलते हुये परिवेष में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ती जा रही है, इसलिए जैविक खेती विकास हेतु बजट में 300 करोड़ रूप्ये आबंटित किये गये हैं। इसके लिए परम्परागत कृषि विकास योजना शुरू होगी।
  • फसल बीमा
    प्राकृतिक आपदा के कारण फसलें खराब हो जाती हैं। फसलों के नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए बजट में 2589 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है।
  • डाॅक घरों से गांवों में कर्ज
    केन्द्रीय बजट 2015-16 मेें ग्रामीणों के विकास के लिए डाॅक घरों से कर्ज देने का प्रावधान किया गया है। पोस्ट आॅफिस से मिलने वाले कर्ज से गांवों में आर्थिक विकास होगा तथा साहूकारों से लेने वाले कर्ज से ग्रामीणों को छुटकारा मिलेगा।
  • खाद्य सुरक्षा
    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिषन के लिए बजट में 530 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है। कृषि से खाद्य सुरक्षा मुददा है। खाद्य सुरक्षा सुनिष्चित करने के लिए बजट में खाद्य अनुदान बढ़ाया गया है, जिससे भारतीय खाद्य निगम की पुर्न संरचना, परिवहन को प्रभावी बनाया जायेगा तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली की क्षमता बढ़ेगी।
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
    राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) में स्थापित ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास निधि के लिए 25000 करोड़ रूप्ये, दीर्घकालीण ग्रामीण ऋण निधि के लिए 15000 करोड़ रूप्ये, अल्पकालीन सहकारी ग्रामीण ऋण पुनर्वित्त निधि के लिए 15000 करोड़ रूप्ये का आबंटन किया गया।
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
    राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) में स्थापित ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास निधि के लिए 25000 करोड़ रूप्ये, दीर्घकालीन ग्रामीण ऋण पुर्णर्वित्त निधि के लिए 15000 करोड़ रूप्ये का आबंटन किया गया।
  • डेयरी एवं मत्स्य विकास
    मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास के लिए प्रमुख कार्यक्रम नीली क्रांति का बजट में ध्यान रखा गया है, जिसके लिए 411 करोड़ रूप्ये दिये जायेंगे। बजट में डेयरी विकास के लिए 481 करोड़ रूप्ये और कृषि उन्नति योजना के लिए 3257 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है।

केन्द्रीय बजट में कृषि को प्राथमिकता दी गई है। किसानों, ग्रामीणों के लिए कृषि योजनाओं-कार्यक्रमों को उपयोगी बनाया गया है, जिनका लाभ लेकर कृषक ग्रामीण, पषुपालक, सब्जी-फल उत्पादक सर्वांगीण विकास कर सकते हैं।

Dr. BhagChandra Jain is renowned author & famous scientist in field of Agriculture. Awarded by Central & State government ,Mr. Bhag is author of more than 1700+ articles published in various international journals,magazines & books.

Currently ,Dr. Jain is working as Professor in Indira Gandhi Agricultural University .

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