कैसे सुरक्षित रखें सदाबहार सब्जी – आलू

                                          

 डाॅ. भागचन्द्र जैन
प्राध्यापक (कृषि अर्थषास्त्र)
कृषि महाविद्यालय,रायपुर-492012

कैसे सुरक्षित रखें सदाबहार सब्जी - आलू - bhagchandra.com

संसार में जिन चार फसलांे की खेती की जाती है, उनमें एक फसल आलू है। आलू को ‘ गरीबों का दोस्त‘ कहा जाता है। पूरे वर्ष भर आलू की सब्जी का उपयोग दैनिक आहार में किया जाता है, क्योंकि आलू में अधिक मात्रा में स्टार्च, विटामिन सी और बी तथा खनिज पाया जाता है। आलू में 20.6 प्रतिषत कार्बोहाइड्रेट, 2.1 प्रतिषत प्रोटीन और 0.3 प्रतिषत वसा पाया जाता है। भारत में लगभग बीस लाख हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। आलू को सदैव ताजा बनाये रखने के लिए यह जरूरी है कि खुदाई के बाद इसे अधिक समय तक सुऱिक्षत रखा जाये।
आलू की खुदाई ऐसे ढंग से की जाये कि कंदों के ऊपर का छिलका सुरक्षित रहे, क्योंकि छिलका उतरने से आलू के कंदों पर रोगों का प्रकोप अधिक होता है। खुदाई के समय जो कंद कट जाते हैं या उनका छिलका उतर जाता है, ऐसे कटे हुए आलू को अच्छे आलू के कंदों से छांटकर अलग रखना चाहिए। खेदे गये आलू के कंदों को छाया में फैलाकर चार-पांच दिन तक सुखाना चाहिए। यदिा संभव हो तो आलू को रगड़ से बचान के लिए कपड़े पर या सीमेंट के फर्ष पर सुखाना चाहिए। सुखाते समय कंदों पर सूर्य के सीधा प्रकाष नहीं पहुंचना चाहिए, क्योंकि सूर्य के सीधे प्रकाष से आलू हरे होने लगते हैं, यदि आलू सुखान ेकी अच्छी व्यवस्था न हो तो इन्हंे खुले मैदान में सुखाया जा सकता है, किन्तु सुखाते समय दिन में पतले काले कपड़े से आलू को ढक देना चाहिए। सूखने से आलू के कंदों का छिलका कड़ा हो जाता है, जिससे परिवहन में आलू के खराब होने की आषंका कम हो जाती है।
अच्छी तरह सूख जाने पर आलू के कंदों की छटाई करनी चाहिए। बड़े, मध्यम तथा छोटे आलू को वर्गीकृत करने के बाद बाजार भेज दिया जाता है। मध्यम आकार के आलू बीज के लिए उपयुक्त होते हैं। बीज के लिए सुरक्षित रखे जाने वाले आलू का बीजोपचार किया जाना चाहिए। उपचार किये गये आलू को छाया में फेैलाकर सुखाया जाना चाहिए, फिर इन आलू के कंदों को बोरों में भरना चाहिए।

  • भंडारण की विकसित नई तकनीक 

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के जालंधर स्थित केन्द्रीय आलू अनुसंधान केंद्र द्वारा आलू भंडारण की ऐसी तकनीक विकसित की गई है, जिससे आलू को 8 महीने तक भंडारित करके रखा जा सकता है। आलू अनुसंधान केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. आषिव मेहता के अनुसार आलू में लगभग 80 प्रतिषत पानी की मात्रा पायी जाती है, मिटटी से आलू निकालने के कुछ सप्ताह बाद यह खराब होने लगता है। आलू में मौजूद इस पानी को निकाल देने से इसका जीवन काल 8 माह तक हो सकता है तथा इतने समय तक आलू को भंडारित कर रखा जा सकता है। इस तकनीक को ‘ डिहाइड्रेषन आॅफ पोेेटेटो‘ कहा जाता है, जिसके लिए डाॅ. मेहता ने एक-एक मषीन बनायी है। इसमें आलू को पहले छीला जाता है फिर काटा जाता है तथा इसे सुखाया जाता है। यह सब मषीन में अपने आप हो जाता है, फिर भंडारण के लिए प्लास्टिक की थैलियों में पैक कर दिया जाता है। सब्जी बनाने में इस आलू का उपयोग करने से उपयुक्त होता है तथा इसका स्वाद ताजे आलू जैसा होता है। पैकिंग से पहले इसमें विटामिन सी और अन्य विटामिन बी, लौहा, जस्ता तथा खनिज मिलाया जाता है।
जलवायु की दृष्टि से आलू रबी की फसल है, किन्तु भंडार गृह या शीत गृह में भंडारण के कारण आलू पूरे वर्ष भर उपलब्ध रहता है, इसलिए आलू को ‘सदाबाहार सब्जी‘ कहा जाता है। जहां सिंचाई साधन हैं वहां आलू की खेती अवष्य की जाये। मिटटी में जल निकास की उचित व्यवस्था हो और भूमि में गोबर की खाद की प्रचुर मात्रा हो।

तालिकाः  भारत में आलू का क्षेत्रफल, उत्पादन एवं उत्पादकता

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स्त्रोत:   कृषि एवं सहकारिता विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली

अनुचिंतन

‘बैंकिंग चिंतन-अनुचिंतन‘ का अक्टूबर- दिसंबर 2014 अंक प्राप्त हुआ। ‘बैंकिंग कल आज और कल‘ विषेषांक में बैंक की विकासात्मक गतिविधियों के साथ अतीत और वर्तमान का परिदृष्य रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है तथा चुनौतियों को उजागर किया गया है। इस अंक के सभी लेख सारगर्भित, सामयिक और सराहनीय है। सामाजिक-आर्थिक विकास में बैंकों का महत्वपूर्ण योगदान है, जिसकी ज्वलंत तस्वीर बैंकिंग चिंतन-अनुचिंतन के माध्यम से शहरों-गांवों और घर-घर तक पहुंचती है। बैकिंग चिंतन-अनुचिंतन के संपादक एवं लेखकों को हार्दिक बधाई।

 डाॅ. भागचन्द्र जैन
प्राध्यापक (कृषि अर्थषास्त्र)प्रचार अधिकारी
इंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय,
कृषि महाविद्यालय, रायपुर – 492012(छत्तीसगढ़)

Dr. BhagChandra Jain is renowned author & famous scientist in field of Agriculture. Awarded by Central & State government ,Mr. Bhag is author of more than 1700+ articles published in various international journals,magazines & books.

Currently ,Dr. Jain is working as Professor in Indira Gandhi Agricultural University .

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