खैक्सी से अतिरिक्त आय लीजिये

डाॅ. भागचन्द्र जैन
प्राध्यापक,
कृषि महाविद्यालय, रायपुर-492012

खैक्सी से अतिरिक्त आय लीजिये- bhagchandra.com

                गृह वाटिका हो या आंगनबाड़ी, फलाद्यान हो या सब्जी का प्रक्षेत्र।  इन सभी स्थानों पर खैक्सी की लता शोभायमान होती है और खैक्सी के हरे फल पौष्टिक और अतिरिक्त आय के साधन होते हैं।  खैक्सी को ककोरा, पड़ोरा आदि नामों से पुकारा जाता है।  जुलाई माह में जब खैक्सी की फसल बाजार में आती है, तब इसका भाव 80 से 100 रूप्ये तक प्रति किलोग्राम रहता है।  खेैक्सी पौष्टिक गुणों से भरपूर होती है, जिसमें 0.6 प्रतिषत प्रोटीन, 1.7 प्रतिषत कार्बोहाइड्रेट 3.8 प्रतिषत स्फुर, 0.1 प्रतिषत खनिज तथा 2.7 प्रतिषत कैल्षियम पाया जाता हैै, इसलिए यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ संतुलित आहार में विषेष महत्व रखती है।

               खैक्सी बेल वाली सब्जी है, जिसकी लता या बेल मध्यप्रदेष और छत्तीसगढ़ के जंगली क्षेत्रों में वर्षा ऋतु में अपने आप उग जाती है। गृह वाटिका, आंगनबाड़ी, सब्जी के प्रक्षेत्रों में खैक्सी का कंद बोना लाभदायक होता है। यदि बीज से पौधा तैयार किया जाता है, तो फल देरी से प्राप्त होते हैं। यदि सिंचाई सुविधा हो तो खैक्सी के कंद फरवरी मार्च में बोना चाहिए, जहां पर सिंचाई सुविधा नहीं है, वहां इसके कंद जून-जुलाई में चाहिए। कंद आसानी से बनाये जा सकते है। मादा पौधों की दो माह पुरानी बेल 30 से 45 से.मी. लम्बी काटकर छायादार स्थान पर लगायी जाती है।

जिसमे दो-तीन माह में जड़ें फूट आती हैं, इन्हीं जड़युक्त कंदों को सामान्यतया जून-जुलाई में तैयार गड्ढों  में लगा दिया जाता है।  परागण क्रिया में सहयोग के लिए मादा पौधों के साथ-साथ लगभग 10 प्रतिषत नर पौधे  लगाना चाहिए।

उचित जल निकास वाली दुमट और रेतीली दुमट भूमि खैक्सी के लिए उपयुक्त होती हैं।  इस मिटटी में 3 मीटर लम्बी और 2 मीटर चैड़ी क्यारियां बना लेते हैं।  इस आकार की प्रत्येक क्यारी में 25 किलो गोबर की सड़ी हुई खाद, 2.5 किलो सुपर फास्फेट और 1 किलो पोटाष अच्छी तरह मिला दिया जाता है।  यदि खेत की मेड़ पर खेैक्सी की खेती करना हो तो मेड़ पर 3 मीटर की दूरी पर 60 से.मी. लम्बे और 60 से.मी. चैड़े तथा 60 से.मी. गहरे गड्ढे में कन्द का रोपण करना चाहिए।  इस गड्ढे में समान अनुपात में मिट्टी और गोबर की खाद का मिश्रण तथा 250 ग्राम सुपरफास्फेट और 100 ग्राम पोटाष भरना चाहिए।  नई बेलों के बनने के समय गड्ढे में 25 ग्राम यूरिया दो बार देना चाहिए, यूरिया देने के बाद सिंचाई करना चाहिए।

खैक्सी के हरे रंग के फलों की सब्जी बनायी जाती है, जिसमें नौ-दस कड़े दाने होते है। खैक्सी की फसल  पर प्रायः कीट-व्याधियों का प्रकोप कम हेात है, फिर भी माहू, लाल कीड़ा आदि से बचाव हेतु दवा छिड़कना चाहिए।

सब्जी की इस बहुगुणकारी फसल के प्रत्येक पौधे से 4 से 5 किलो फल प्राप्त होते हैं। एक पौधे से लगभग 40 से 50 फलों की उपज प्राप्त होती है। यदि सिंचाई सुविधा उपलब्ध हेाती है, तब फरवरी-मार्च में कंद लगाना चाहिए, यदि इस समय में कंद लगाये जाते हैं तो जल्दी फूल आ जाते हैं और जल्दी ही फल लग जाते हैं। बौआई जल्दी करने से खैक्सी को अच्छा बाजार भाव मिल जाता है। खैक्सी की खेती फलोद्यान में अंतवर्ती फसल के रूप् में आसानी से की जा सकती है। फलाद्यान की खाली भूमि पर ली गई फसल से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो जाती है। अन्य बेल वाली फसलों के साथ में भी खैक्सी की फसल से अच्छी आमदनी प्राप्त होती है।

Dr. BhagChandra Jain is renowned author & famous scientist in field of Agriculture. Awarded by Central & State government ,Mr. Bhag is author of more than 1700+ articles published in various international journals,magazines & books.

Currently ,Dr. Jain is working as Professor in Indira Gandhi Agricultural University .

Comments

comments