हे किसान ! देष की शान

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हे किसान ! देष की शान।
खेती में तुम समर्पित,
तुम्हारा सारा जीवन दान।
तुम्हारी कड़ी मेहनत का
भू कण-कण करे बखान।
तुमसे उज्जवलित हो रहा,
खेत और खलिहान।
हे किसान ! देष की शान।
तुम तो भूमि पुत्र हो,
है तुम्हारी महिमा महान्।
ताप-षीत का तुम्हें भय नहीं,
तुमसे तो प्रकृति डरती है।
अपार परिश्रम से तुम्हारे
देती अन्न धरती है।
हे किसान ! देष की शान।
परहित में तुम कर रहे
अपने तन का दान।
गूंज रही है चहुंदिषि
बस एक ही आवाज।
कृषि से ही होगी प्रगति
और खुषहाली आज।
हे किसान ! देष की शान।
खेती है तुम्हारी सहेली,
फसलों में तुम्हारी जान् ।
तुम्हारी तपस्या से होगी,
खाद्य् समस्या समाधान््।
हे जन जीवन दाता किसान।
समृद्वि रहे तुझे वरदान।

आदि पुरूष आदिवासी

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धन्य-धन्य हो ‘आदि‘ पुरूष आदिवासी।
हे भारतीय संस्कृति के प्रेरक, वन के वासी।
वनों के अंचल में बिखरे हैं भारत के गांव।
जहां ये त्यागी – वीर, कोसों चलते नंगे पांव।
बैगा, गांेड़, कोल, कोरकू इनका परिचय परिभाषी।
भीषण गर्मी-षीत के तपस्वी – ये आदिवासी।

जहां वन हैं – वहां इनकी जन्मभूमि हैं।
वनोपज देन जिनकी, व नही कर्मभूमि है।
करते हैं कड़ी मेहनत, कम कीमत पाते हैं।
खुद भूखे रहकर, दूसरों को खिलाते हैं।
ईमानदार भोले-भाले, ये सचमुच सन्यासी।
तन-मन के धनी हैं, ये आदिवासी।

अन्याय से मुक्ति हेतु इनका जीवन छटपटाता था।
शोषण से जिनका दिल कुछ घबड़ाता था।
तेंदूपत्ता, चिरौंजी, शहद से जुड़ा जब सहकार।
तब वनवासी विकास के खुज गये सब द्वार।
कर्तव्यों से बदल जायेगी, इनकी भाग्य राषि ।
क्रान्ति के अग्रदूत बनेंगे, ये वीर आदिवासी।

ये वन मार्गों के निर्माता, वन के प्रहरी हैं।
प्रकृति जिनकी सहेली, गाथा उनकी गहरी है।
स्वावलम्बी हैं सदियों से, ये प्रगति के अभिलाषी।
अग्रणीय रहे हैं सदैव, साहित्य कहता इतिहासी।
हे भारतीय संस्कृति के प्रेरकक, वन के वासी।
धन्य-धन्य हो ‘आदि‘ पुरूष आदिवासी।

नई कृषि नीति का संदेष

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हे किसान । देष की शान।
हमारा देष है कृषि प्रधान।
हमारा लक्ष्य कृषि उपज बढ़ाना।
यत्र तत्र सर्व्रत्र समृद्वि लाना।
नई कृषि नीति का संदेष।
विकसित बनाओ भारत देष।

बढ़ते जाओ सिंचाई का क्षेत्र।
व्यवसायिक बनाओ हर प्रक्षेत्र।
भूमि जलवायु के अनुसार करो
उन्नत तकनीक का विस्तार।
नई कृषि नीति का संदेष।
मिश्रित खेती अपनाओ विषेष।

दलहन-तिलहन और धान्य।
फसलों में हैं ये तीन महान।
फसल विविधिता को अपनाओ।
समग्र विकास कृषि से लाओ।
नई कृषि नीति का संदेष।
फलों-सब्जियों की खेती विषेष।

करो हरित क्र्र्रांति का विस्तार।
जिससे होगी गरीबी रेखा पार।
खेतांे में हरियाली लाओ।
गांवों में खुषहाली लाओ।
नई कृषि नीति का संदेष।
विकसित बनाओ भारत देष।

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