All Fertilizers along with firm name and pricing

urea-fertilizer2.jpg (1024×683)

 

Sl.NoFertilizer NameFirm NamePrice (Unit in Rs./50 kg bag)
1Urea – 46.0 / 50 Kg. BagMCF276.12
2Urea – 46.0 / 50 Kg. BagRCF276.12
3Urea – 46.0 / 50 Kg. BagKRIBHCO276.12
4Urea – 46.0 / 50 Kg. BagCFL276.12
5Urea – 46.0 / 50 Kg. BagZUARI276.12
6Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13 / 50 Kg. BagTEST368.94
7Am. Chloride – 25.0 / 50 Kg. BagTEST0.00
8Urea – 46.0 / 50 Kg. BagSPIC278.51
9Complex NPK – 20:20:0:0 / 50 Kg. BagSPIC466.93
10Urea – 46.0 / 50 Kg. BagIFFCO276.12
11Urea – 46.0 / 50 Kg. BagMFL278.88
12Complex NPK – 16:16:16 / 50 Kg. BagIPL368.70
13TSP – 42.5 / 50 Kg. BagIPL418.60
14Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13 / 50 Kg. BagRCF419.74
15Complex NPK – 12:32:16 / 50 Kg. BagZUARI588.00
16Complex NPK – 20:20:0:0 / 50 Kg. BagCFL525.00
17Urea(Ind) – 46.0 / 50 Kg. BagKRIBHCO268.23
18Urea(Imp) – 46.0 / 50 Kg. BagKRIBHCO265.15
19Urea(Ind) – 46.0 / 50 Kg. BagMFL268.14
20Urea(Ind) – 46.0 / 50 Kg. BagMCF268.14
21Complex NPK – 20:20:0:0 / 50 Kg. BagMCF495.00
22Am. Chloride – 25.0 / 50 Kg. BagTAC435.00
23Complex NPK – 12:32:16 / 50 Kg. BagMCF667.50
24Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13:0.3 / 50 Kg. BagIFFCO650.00
25Complex NPK – 12:32:16 / 50 Kg. BagCFL645.00
26Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13 / 50 Kg. BagCFL539.00
27Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13:0.3 / 50 Kg. BagCFL554.00
28Complex NPK – 14:28:14 / 50 Kg. BagCFL664.00
29DAP – 18:46:00 / 50 Kg. BagNFCL1222.50
30MAP – 11:52:00 / 50 Kg. BagIPL910.00
31Pot. Chloride – K.60.0(MOP) / 50 Kg. BagNFCL872.00
32Pot. Chloride – K.60.0(MOP) / 50 Kg. BagIPL840.00
33SSP – 16.0 / 50 Kg. BagSPIC262.58
34Am. Phos. Sulp. Nitrate – 16:20:0:13 / 50 Kg. BagIPL910.00
35Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13 / 50 Kg. BagSPIC859.79
36Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13 / 50 Kg. BagIPL740.00
37Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13 / 50 Kg. BagIFFCO950.00
38Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13 / 50 Kg. BagMCF934.00
39Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13 / 50 Kg. BagNFCL958.86
40Complex NPK – 20:20:0:0 / 50 Kg. BagIPL700.00
41Complex NPK – 20:20:0:0 / 50 Kg. BagIFFCO700.00
42Complex NPK – 20:20:0:0 / 50 Kg. BagZUARI707.00
43Complex NPK – 10:26:26 / 50 Kg. BagNFCL1111.25
44Urea(Ind) – 46.0 / 50 Kg. BagIPL270.76
45Urea(Ind) – 46.0 / 50 Kg. BagIFFCO270.68
46Urea(Ind) – 46.0 / 50 Kg. BagSPIC270.50
47Urea(Ind) – 46.0 / 50 Kg. BagNFCL270.76
48Am. Phos. Sulp. Nitrate – 16:20:0:13 / 50 Kg. BagZUARI0.00
49Complex NPK – 12:32:16 / 50 Kg. BagRCF0.00
50Pot. Chloride – K.60.0(MOP) / 50 Kg. BagMFL0.00
51Urea(Imp) – 46.0 / 50 Kg. BagIPL270.76
52Urea(Imp) – 46.0 / 50 Kg. BagIFFCO270.68
53Urea(Ind) – 46.0 / 50 Kg. BagRCF268.23
54Urea(Imp) – 46.0 / 50 Kg. BagCFL270.50
55DAP – 18:46:00 / 50 Kg. BagIFFCO1125.00
56DAP – 18:46:00 / 50 Kg. BagCFL1125.00
57DAP – 18:46:00 / 50 Kg. BagMCF1131.00
58DAP – 18:46:00 / 50 Kg. BagIPL1125.00
59DAP – 18:46:00 / 50 Kg. BagSPIC1136.50
60DAP – 18:46:00 / 50 Kg. BagZUARI1127.50
61DAP – 18:46:00 / 50 Kg. BagRCF1125.00
62DAP – 18:46:00 / 50 Kg. BagKRIBHCO1125.00
63Pot. Chloride – K.60.0(MOP) / 50 Kg. BagZUARI802.50
64Pot. Chloride – K.60.0(MOP) / 50 Kg. BagCFL800.00
65Pot. Chloride – K.60.0(MOP) / 50 Kg. BagMCF800.00
66Pot. Chloride – K.60.0(MOP) / 50 Kg. BagRCF800.00
67Pot. Chloride – K.60.0(MOP) / 50 Kg. BagFACT785.00
68SSP – 16.0 / 50 Kg. BagCPF362.00
69SSP – 16.0 / 50 Kg. BagCFL362.00
70SSP – 16.0 / 50 Kg. BagKOTHARI362.00
71Am. Phos. Sulp. Nitrate – 16:20:0:13 / 50 Kg. BagCFL864.00
72Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13 / 50 Kg. BagFACT887.55
73Am. Phos. Sulphate – 20:20:0:13:0.3 / 50 Kg. BagFACT912.80
74Complex NPK – 15:15:15 / 50 Kg. BagRCF739.50
75Complex NPK – 20:20:0:0 / 50 Kg. BagRCF770.50
76Complex NPK – 28:28:0:0 / 50 Kg. BagCFL1120.00
77Complex NPK – 10:26:26 / 50 Kg. BagIFFCO1045.00
78Complex NPK – 10:26:26 / 50 Kg. BagCFL1031.00
79Complex NPK – 10:26:26 / 50 Kg. BagZUARI1048.00
80Complex NPK – 10:26:26 / 50 Kg. BagMCF1045.00
81Complex NPK – 14:35:14 / 50 Kg. BagCFL1096.00
82Am. Sulphate – 20.6 / 50 Kg. BagFACT526.35
83Complex NPK – 17:17:17 / 50 Kg. BagMFL927.00
Source: www.tnagrisnet.tn.gov.inUpdated as on 10.07.2014

 

छत्तीसगढ़ में जल संसाधन और कृषि विकास

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

रामराज्य का कौषल प्रदेष तथा भारत का 26वां प्रदेष छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहां उपजाऊं जमीन है। जंगल है। रत्नगर्भा धरती हैं। दुर्लभ जैव विविधता है। महानदी, इन्द्रावती, षिवनाथ, अरपा, खारून जैसी जीवनदायिनी नदियां है। यहां 1041, सिंचाई जलाषय और 36 हजार से अधिक ग्रामीण तालाब हैं अर्थात छत्तीसगढ़ में सतही जल और भू-जल अधिक है, यहां ऊपर पानी है और नीचे पानी हैं- बस जरूरत ह ैजल संसाधनों के दोहन की। छत्तीसगढ़ अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है। जहां तरह-तरह की भूमि है। जलवायु है। महान दार्षनिक टालस्टाय ने लिखा है कि महानदी की रेत में हीरे पाये जाते हैं। यहां हीरा बाक्साईट, लौह अयस्क कोयला चूना डोलोमाइट, टिन, कोरण्डम तथा क्वार्टजाईट जैसे खनिजों के दोहन से राजस्व की भारी राषि प्राप्त होती है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है, जहां सिंचाई क्षेत्र में बड़ी विसंगति है।
छत्तीसगढ़ का कुल भोैगोलिक क्षेत्रफल 137.89 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से केवल 46.71 लाख हेक्टेयर में फसलों की खेती की जा रही है। इस प्रदेष में धान की खेती अधिकांष क्षेत्र में की जाती है, जबकि यहां की जलवायु दलहन-तिलहन -फल-सब्जी तथा नकदी फसलों के लिए उपयुक्त है।
जलाषयों और तालाबों का प्रदेषः
छत्तीसगढ़ में 1041 जलाषय हैं, जिनमें माड़म सिल्ली, दुधावा, रविषंकर सागर, सोंढूर प्रमुख हैं। प्रदेष में 36844 सिंचाई तालाब हैं। तालाबों प्रदेष छत्तीसगढ़ कहलाता है। जलाषयों और तालाबों का समुचित दोहन कर यहां एक फसली क्षेत्र को बहुफसली में बदला जा सकता है।
सामूहिक उद्वहन योजनाः
किसानों ने सिंचाई की उपयोगिता को समझते हुये सामूहिक उद्वहन योजना को अपनाया है, जिससे खरीफ के अलावा रबी और जायद में फसलों का क्षेत्र बढ़ा है। फसलों की उत्पादकता में वृद्वि हुई है तथा कृषि विकास में अपेक्षित सफलता मिली है।
फसलों की उत्पादकता मंे वृद्वि:
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के तिल्दा और अभनपुर विकास खण्ड के कृषकों के सर्वेक्षण से ज्ञात हुआ है कि किसानों को सब्जी वाली फसलों से अन्य फसलों की अपेक्षा अधिक आमदनी मिलती है।

 

 


स्त्रोत: कृषि विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर, 2013

 

तिल्दा और अभनपुर विकास खण्ड में भटा की खेती से क्रमषः 50 हजार रूप्ये तथा 45.5 हजार रूपये प्रति हेक्टेयर आमदनी प्राप्त हुई है जबकि धान में यह आमदनी 14 हजार रूपये से लेकर 17 हजार रूपये तक प्राप्त हुई है। जायद मंे की गई धान की सिंचित खेती में खरीफ धान की अपेक्षा अधिक आय प्राप्त हुई है। जायद में भटा, भिण्डी की अपेक्षा धान की कम आमदनी आंकी गई है।

 

सिंचाई:

प्रदेष में केवल 31 प्रतिषत क्षेत्र मंे सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। जहां शून्य से लेकर 87 प्रतिषत तक सिंचाई का क्षेत्रफल विभिन्न जिलों में उपलब्ध है। यहां सिंचाई के क्षेत्र में बड़ा अंतर नजर आता है। छत्तीसगढ़ में अर्थव्यवस्था का आधार कृषि है, जहां जल संसाधनों के प्रबंधन हेतु प्रभावी जल नीति बनायी जानी चाहिए।

प्रदेष में जहां सिंचाई साधन उपलब्ध हैं:- वहां अधिक आमदनी देने वाली फसलों की खेती को अपनाया जाये। सदियों से दाल-भात का सम्बंध रहा है, जहां धान की खेती की जाती है-वहां दलहन की खेती अवष्य की जानी चाहिए।
प्रदेष मंे अधिकांष क्षेत्र में सिंचाई नहरों द्वारा की जाती है, जहां जल के वितरण और नहरों के रखरखाव पर ध्यान देने की आवष्यकता है। जल वितरण में किसानों की भागीदारी सुनिष्चित की जानी चाहिए।
जल-चक्र को बनाये रखने के लिए जंगलों के विनाष को रोका जाये तथा वन क्षेत्र में वृक्षारोपण किया जाये।
नलकूप, कुंआ निर्माण हेतु छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग में एक पृथक प्रकोष्ठ (ैमचंतंजम ब्मसस) बनाया जाये, जिससे किसानों को कूप, नलकूप खनन की कार्यवाही में सरलता हो।

प्राध्यापक, (कृषि अर्थषास्त्र)
इंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय,
कृषि महाविद्यालय,कृषक नगर,
रायपुर 492012 (छत्तीसगढ़)

खैक्सी से अतिरिक्त आय लीजिये

  • डाॅ. भागचन्द्र जैन
    प्राध्यापक,
    कृषि महाविद्यालय, रायपुर-492012

गृह वाटिका हो या आंगनबाड़ी, फलाद्यान हो या सब्जी का प्रक्षेत्र। इन सभी स्थानों पर खैक्सी की लता शोभायमान होती है और खैक्सी के हरे फल पौष्टिक और अतिरिक्त आय के साधन होते हैं। खैक्सी को ककोरा, पड़ोरा आदि नामों से पुकारा जाता है। जुलाई माह में जब खैक्सी की फसल बाजार में आती है, तब इसका भाव 80 से 100 रूप्ये तक प्रति किलोग्राम रहता है। खेैक्सी पौष्टिक गुणों से भरपूर होती है, जिसमें 0.6 प्रतिषत प्रोटीन, 1.7 प्रतिषत कार्बोहाइड्रेट 3.8 प्रतिषत स्फुर, 0.1 प्रतिषत खनिज तथा 2.7 प्रतिषत कैल्षियम पाया जाता हैै, इसलिए यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ संतुलित आहार में विषेष महत्व रखती है।

खैक्सी बेल वाली सब्जी है, जिसकी लता या बेल मध्यप्रदेष और छत्तीसगढ़ के जंगली क्षेत्रों में वर्षा ऋतु में अपने आप उग जाती है। गृह वाटिका, आंगनबाड़ी, सब्जी के प्रक्षेत्रों में खैक्सी का कंद बोना लाभदायक होता है। यदि बीज से पौधा तैयार किया जाता है, तो फल देरी से प्राप्त होते हैं। यदि सिंचाई सुविधा हो तो खैक्सी के कंद फरवरी मार्च में बोना चाहिए, जहां पर सिंचाई सुविधा नहीं है, वहां इसके कंद जून-जुलाई में चाहिए। कंद आसानी से बनाये जा सकते है। मादा पौधों की दो माह पुरानी बेल 30 से 45 से.मी. लम्बी काटकर छायादार स्थान पर लगायी जाती है।

जिसमे दो-तीन माह में जड़ें फूट आती हैं, इन्हीं जड़युक्त कंदों को सामान्यतया जून-जुलाई में तैयार गड्ढों में लगा दिया जाता है। परागण क्रिया में सहयोग के लिए मादा पौधों के साथ-साथ लगभग 10 प्रतिषत नर पौधे लगाना चाहिए।

उचित जल निकास वाली दुमट और रेतीली दुमट भूमि खैक्सी के लिए उपयुक्त होती हैं। इस मिटटी में 3 मीटर लम्बी और 2 मीटर चैड़ी क्यारियां बना लेते हैं। इस आकार की प्रत्येक क्यारी में 25 किलो गोबर की सड़ी हुई खाद, 2.5 किलो सुपर फास्फेट और 1 किलो पोटाष अच्छी तरह मिला दिया जाता है। यदि खेत की मेड़ पर खेैक्सी की खेती करना हो तो मेड़ पर 3 मीटर की दूरी पर 60 से.मी. लम्बे और 60 से.मी. चैड़े तथा 60 से.मी. गहरे गड्ढे में कन्द का रोपण करना चाहिए। इस गड्ढे में समान अनुपात में मिट्टी और गोबर की खाद का मिश्रण तथा 250 ग्राम सुपरफास्फेट और 100 ग्राम पोटाष भरना चाहिए। नई बेलों के बनने के समय गड्ढे में 25 ग्राम यूरिया दो बार देना चाहिए, यूरिया देने के बाद सिंचाई करना चाहिए।

खैक्सी के हरे रंग के फलों की सब्जी बनायी जाती है, जिसमें नौ-दस कड़े दाने होते है। खैक्सी की फसल पर प्रायः कीट-व्याधियों का प्रकोप कम हेात है, फिर भी माहू, लाल कीड़ा आदि से बचाव हेतु दवा छिड़कना चाहिए।

सब्जी की इस बहुगुणकारी फसल के प्रत्येक पौधे से 4 से 5 किलो फल प्राप्त होते हैं। एक पौधे से लगभग 40 से 50 फलों की उपज प्राप्त होती है। यदि सिंचाई सुविधा उपलब्ध हेाती है, तब फरवरी-मार्च में कंद लगाना चाहिए, यदि इस समय में कंद लगाये जाते हैं तो जल्दी फूल आ जाते हैं और जल्दी ही फल लग जाते हैं। बौआई जल्दी करने से खैक्सी को अच्छा बाजार भाव मिल जाता है। खैक्सी की खेती फलोद्यान में अंतवर्ती फसल के रूप् में आसानी से की जा सकती है। फलाद्यान की खाली भूमि पर ली गई फसल से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो जाती है। अन्य बेल वाली फसलों के साथ में भी खैक्सी की फसल से अच्छी आमदनी प्राप्त होती है।

छत्तीसगढ़ के बजट में कृषि को प्राथमिकता

  • डाॅ. भागचन्द्र जैन
    प्राध्यापक, (कृषि अर्थषास्त्र)
    कृषि महाविद्यालय,रायपुर-492012
    (छत्तीसगढ़)

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                                                  रामराज्य का कौषल प्रदेष तथा भारत का 26 वां प्रदेष छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, क्या नहीं है हमारे छत्तीसगढ़ में ? उपजाऊ जमीन है। जंगल है। रत्न-गर्भा धरती है। दुर्लभ जैव विविधता है। महानदी, इन्द्रवती, षिवनाथ, अरपा, खारून जैसी जीवनदायिनी नदियां है। यहां 1041 सिंचाई जलाषय और 36844 तालाब हैं अर्थात यहां सतही जल और भू-जल अधिक है। यहां ऊपर पानी है और नीचे पानी है- बस जरूरत है इन संसाधनों के दोहन की। छत्तीसगढ़ अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है। प्रदेष में भाटा, मटासी, डोरसा, कन्हार तरह-तरह की भूमि हेै। तरह-तरह की जलवायु है। महान दार्षनिक टालस्टाय ने लिखा है कि महानदी की रेत में हीरे पाये जाते हैं। हीरा, वाक्साईट,लौह अयस्क, कोयला, चूना, डोलामाईट, टिन, कोरण्डम तथा क्वार्टजाइट जैसे खनिजों के दोहन से राजस्व की भारी राषि प्राप्त होती है।

छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है, यहां की संस्कृति धान से जुड़ी है। प्रदेष वर्ष 2015-16 का बजट 13 मार्च 2015 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें 65 हजार करोड़ रूप्ये का प्रावधान है। बजट में कृषि के लिए 10676 करोड़ रूप्ये आबंटित किये गये हैं, जबकि वर्ष 2014-15 में कृषि के लिए 8495 करोड़ रूप्ये रखे गये थे। कृषि एवं उद्यानिकी, पषुपालन, सहकारिता, सिंचाई, कृषि पम्प अनुदान के लिए आबंटित राषि इस प्रकार हैः

सकल घरेलू उत्पाद
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2014-15 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्वि दर 13.20 प्रतिषत रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि भारत में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्वि दर 11.59 प्रतिषत होने का अनुमान लगाया गया है। प्रदेष में कृषि की विकास दर 14.18 प्रतिषत आंकी गई है, जिसमें कृषि के साथ-साथ सहयोगी व्यवसाय पषुपालन, वानिकी, मत्स्य आदि शामिल हैं। उद्योग की विकास दर 10.62 प्रतिषत होने का अनुमान लगाया गया है, जिसमें खनिज, निर्माण, मेनुफेक्चुरिंग, विद्युत, गैस और जल आपूर्ति को शामिल किया गया है। सेवा क्षेत्र की विकास दर का अनुमान 15.21 प्रतिषत लगाया गया है। वर्ष 2014-15 में प्रदेष में प्रति व्यक्ति आय 64442 रूप्ये होने का अनुमान लगाया गया है, जो कि वर्ष 2013-14 में 58547 रूपये थी।

मुख्य प्रावधान

  •  प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 30 करोड़ रूप्ये
  • 20 नये पषु औषधालय
  • अरपा, भैंसाझार परियोजना के लिए 201 करोड़ रूपये
  • 92 मध्यम -लद्यु सिंचाई योजनाओं के लिए 97 करोड़ रूप्ये
  •  सिंचाई के लिए खारून विकास प्राधिकरण की स्थापना
  •  पषु चिकित्सा विष्वविद्यालय के लिए 60 करोड़ रूप्ये
  •  इंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय, रायपुर में चार नये विषयों की शुरूआत
  •  जैविक उर्वरक एवं कीटनाषकों की गुणवत्ता सुनिष्चित करने के लिए रायपुर में बायो कंट्रोल प्रयोगषाला की स्थापना
  • दुर्ग की तांदुल नहर परियोजना की लाइनिंग के लिए 28 करोड़ रूप्ये
  • पंडरिया में नये शक्कर कारखाने की स्थापना
  • रायगढ़ जिले की केलो सिंचाई परियोजना के तहत नहर निर्माण के लिए 30 करोड़ रूप्ये
  • ब्याज मुक्त अल्पकालीन कृषि ऋण के लिए 158 करोड़ रूपये

छत्तीसगढ़ के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान 22 प्रतिषत आंका गया है, जबकि औद्योगिक और सेवा क्षेत्र का योगदान क्रमषः 38 और 40 प्रतिषत रहा है। यहां कृषि विकास के लिए प्र्याप्त अवसर हैं। प्रदेष में तरह-तरह की धान की किस्में हैं, जहां 27 जिलों की पहचान वहां होने वाली सुगंधित धान की किस्मो से है। बजट में कृषि को प्राथमिकता दी गई है। छत्तीसगढ़ का मैदान, उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र और बस्तर का पठार तीन कृषि जलवायु क्षेत्र है – जहां दलहन-तिलहन, फल-सब्जी की खेती सीमित क्षेत्र में की जाती है। बजट में कृषि-उद्यानिकी-पषुपालन की योजनाओं, कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है, जिनका लाभ लेकर कृषक, पषुपालक, सब्जी-फल उत्पादक खाद्य सुरक्षा सुनिष्चित कर सकते हैं तथा प्रदेष में दूसरी हरित क्रांति का बिगुल बजा सकते हैं।

केन्द्रीय बजट और किसान

  • डाॅ. भागचन्द्र जैन
    प्राध्यापक, (कृषि अर्थषास्त्र)
    कृषि महाविद्यालय, रायपुर-492012

 

‘कृषिरेव महालक्ष्मीः‘अर्थात कृषि ही सबसे बड़ी लक्ष्मी है। भारतीय अर्थ्रव्यवस्था की रीढ़ कृषि कहलाती है, जहां 49 प्रतिषत व्यक्ति खेती कर रहे हैं। भारत विकासषील देष है। भारत सबसे बड़ा चांवल निर्यातक देष है, जहां सबसे ज्यादा दूध और उद्यानिकी फसलों का उत्पादन होता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2014-15 के अनुसार भारत की कृषि विकास दर 5 प्रतिषत रही है, जबकि आर्थिक विकास की दर 7.4 प्रतिषत रही है। सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान हर साल घटता जा रहा है। वास्तविकता यह है कि कृषि केवल जीवन यापन का साधन बनकर रह गई है।
कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए वर्ष 2015-16 के बजट में विभिन्न प्रावधान किये गये हैं, जैसे- कृषि साख में वृद्वि, डाकघर से गावों में कर्ज देना, भूमि स्वास्थ्य कार्ड, ग्रामीण साख निधि में वृद्वि आदि। कृषि और सम्बंधित गतिविधियों के लिए बजट में 11657 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो कि वर्ष 2014-15 में 10199 करोड़ रूप्ये था। कृषि और सम्बंधित व्यवसायों के लिए बजट में की गई वृद्वि से कृषि विकास की दर तेज होगी।

मुख्य प्रावधान
केन्द्रीय बजट में कृषि विकास को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न प्रावधान किये गये हैं, जैसेः

  • कृषि ऋण का लक्ष्य 8.5 लाख करोड़ रूप्ये होगा।
  • तीन लाख रूप्ये तक का कृषि ऋण 7 प्रतिषत ब्याज दर पर यथावत मिलेगा।
  • प्रधानमंत्री ग्रामीण सिंचाई योजना शुरू होगी।
  •  मृदा स्वास्थ्य को विषेष प्राथमिकता।
  • ग्रामीण संरचना कोष के लिए 2500 करोड़ रूप्ये प्रस्तावित
  •  फसल बीमा के लिए 2589 करोड़ रूप्ये स्वीकृत।
  • जैविक खेती विकास हेतु 300 करोड़ रूप्ये का प्रावधान
  • ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा।
  •  डेयरी विकास अभियान के लिए 481 करोड़ रूप्ये का आबंटन।
  • नीली का्रंति के लिए 411 करोड़ रूप्ये का प्रावधान।
  • उर्वरक अनुदान के लिए 72969 करोड़ रूप्ये का आबंटन।
  • दीर्घकालीन ग्रामीण साख निघि के लिए 15000 करोड़ रूप्ये का प्रावधान।
  •  डाॅक घरों से मिलेगा गांवों में कर्ज।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 1800 करोड़ रूप्ये का आबंटन।
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए 4500 करोड़ रूप्ये का आबंटन।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुऱक्षा मिषन के लिए 530 करोड़ रूप्ये का प्रावधान।
    कृषि साख
    कृषि में ऋण इंजेक्षन की भूमिका निभाता है। किसानों को समय पर कर्ज मिले, इसके लिए बजट में प्रावधान किया गया है। कृषि में पूंजी निवेष बढ़ाने की दृष्टि से बजट में 8.5 लाख करोड़ रूप्ये ऋण का प्रावधान किया गया है, जो कि वर्ष 2014ऋ15 में 8 लाख करोड़ रूप्ये था। तीन लाख रूप्ये तक का कृषि ऋण 7 प्रतिषत दर पर यथावत मिलेगा।
  • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
    बजट में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए 1800 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए 5300 करोड़ रूप्ये बजट में आबंटित किये गये हैं। बजट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना का उददेष्य हर किसान की भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है ओैर सरकार का लक्ष्य ‘हर बूंद के साथ अधिक फसल‘ के जरिये पानी का उचित उपयोग करना है। सिंचाई सुविधा में वृद्वि से फसल विविधिकरण को बढ़ावा मिलेगा तथा फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी।
  • उर्वरक अनुदान
    केन्द्रीय बजट में उर्वरक अनुदान के लिए 72969 करोड़ रूप्ये आबंटित किये गये हैं, जो कि वर्ष 2014 -15 में 70967 करोड़ रूप्ये आबंटित थे। उर्वरकों की उपयोगिता बढ़ाने में उर्वरक अनुदान महत्वपूर्ण कदम होगा।
  • दीर्घकालीन ग्रामीण साख निधि
    सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की वित्तिय स्थिति सुदृढ़ बनाने के लिए दीर्घकालीन ग्रामीण साख निधि (Long Term Credit Fund) के लिए बजट में 15000 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड
    खेती मिटटी पर आधारित होती है। जैसी मिटटी होगी, जैसे उसमें पोषक तत्व होंगे वैसी ही फसलों की खेती की जायेगीं । इसके लिए मिटटी का स्वास्थ्य जानना आवष्यक है। केन्द्रीय बजट में घेषणा की गई है कि प्रत्येक किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) उपलब्ध कराया जायेगा।
  • जैविक खेती
    जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। बदलते हुये परिवेष में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ती जा रही है, इसलिए जैविक खेती विकास हेतु बजट में 300 करोड़ रूप्ये आबंटित किये गये हैं। इसके लिए परम्परागत कृषि विकास योजना शुरू होगी।
  • फसल बीमा
    प्राकृतिक आपदा के कारण फसलें खराब हो जाती हैं। फसलों के नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए बजट में 2589 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है।
  • डाॅक घरों से गांवों में कर्ज
    केन्द्रीय बजट 2015-16 मेें ग्रामीणों के विकास के लिए डाॅक घरों से कर्ज देने का प्रावधान किया गया है। पोस्ट आॅफिस से मिलने वाले कर्ज से गांवों में आर्थिक विकास होगा तथा साहूकारों से लेने वाले कर्ज से ग्रामीणों को छुटकारा मिलेगा।
  • खाद्य सुरक्षा
    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिषन के लिए बजट में 530 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है। कृषि से खाद्य सुरक्षा मुददा है। खाद्य सुरक्षा सुनिष्चित करने के लिए बजट में खाद्य अनुदान बढ़ाया गया है, जिससे भारतीय खाद्य निगम की पुर्न संरचना, परिवहन को प्रभावी बनाया जायेगा तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली की क्षमता बढ़ेगी।
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
    राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) में स्थापित ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास निधि के लिए 25000 करोड़ रूप्ये, दीर्घकालीण ग्रामीण ऋण निधि के लिए 15000 करोड़ रूप्ये, अल्पकालीन सहकारी ग्रामीण ऋण पुनर्वित्त निधि के लिए 15000 करोड़ रूप्ये का आबंटन किया गया।
  • राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक
    राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) में स्थापित ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास निधि के लिए 25000 करोड़ रूप्ये, दीर्घकालीन ग्रामीण ऋण पुर्णर्वित्त निधि के लिए 15000 करोड़ रूप्ये का आबंटन किया गया।
  • डेयरी एवं मत्स्य विकास
    मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास के लिए प्रमुख कार्यक्रम नीली क्रांति का बजट में ध्यान रखा गया है, जिसके लिए 411 करोड़ रूप्ये दिये जायेंगे। बजट में डेयरी विकास के लिए 481 करोड़ रूप्ये और कृषि उन्नति योजना के लिए 3257 करोड़ रूप्ये का प्रावधान किया गया है।

केन्द्रीय बजट में कृषि को प्राथमिकता दी गई है। किसानों, ग्रामीणों के लिए कृषि योजनाओं-कार्यक्रमों को उपयोगी बनाया गया है, जिनका लाभ लेकर कृषक ग्रामीण, पषुपालक, सब्जी-फल उत्पादक सर्वांगीण विकास कर सकते हैं।

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